गम न करें – ४

अल्लाह (भगवान) का हुकुम होकर रहेगा, मुस्तकबिल (भविष्य) के बारे में अंदाजे ना लगायें. होने वाला अपने वक्त पर ही होगा, जल्दी क्यों चाहते हैं? फल को पकने दें, पकने से पहले क्यों तोड़ना चाहते हैं? कल एक मफकुद (खोया हुआ) सच है. खोया हुआ नापेद. जिसका अभी वजूद है, न मजा, न रंग तो हम इसकी परेशानियों, हादसों, वाकियात, आरजूओं में सोच सोच कर अपने आप को हलकान क्यों करें. जब के अभी हमें मालूम नहीं के वह आयेगा भी या नहीं, और मुस्सरत (ख़ुशी) भरा होगा या नहीं? अहम यह है के वह अभी गैब की दुनिया में है. वजूदे दुनिया में नहीं आया. तो हम पहले से इसे पाने की कोशिश क्यों करें, जब मुमकिन है हम इस तक पहुंचे या न पहुंचे.

भविष्य के बारे में झूठी लड़ाई लड़ना, गैब की किताब खोलकर इसकी ख्याली परेशानियों पर कराहना ऐसी बात है मानो साया से कुश्ती लड़ना हो. बहुत से लोग दुनिया के भविष्य को अँधेरा, भूख, प्यास, बीमारीयों और मुसीबत से भरा समझते हैं. यह सब शैतानी धोखा है. जब के अल्लाह (भगवान) अपना मगफिरत और फजल का वादा करता है. कितने लोग हैं जो ये सोच कर रो रहे हैं कि कल वह भूखा रहेगा, एक साल बाद बीमार हो जायगा, सौ साल बाद दुनिया ही ख़त्म हो जायगी. हालाँकि जब उम्र दुसरे के अख्तियार में है तो फिर अनहोनी के बारे में क्यों सोचें. इसलिए गम न करें, खुश रहें.

कुछ बेवकूफ अल्लाह (भगवान) को भी बुरा भला कह देते हैं, जो खालिक है, ब्रह्मा है, जो मालिक है तमाम आलम का, जो पालनहार है, सबको रोजी देता है. जिसके सिवा कोई पूजनीय नहीं फिर हम और आप जो गुनाहगार हैं, गलतियाँ करते रहते हैं, की क्या हैसियत. हमें तो लोगों का बेवजह बुराई और ताना का सामना करना ही पड़ेगा. हमें बर्बाद करने के मंसूबे बनेंगे. जान बूझ कर हमारी बुराई की जायगी. जब तक आप दे रहे हैं, बना रहे हैं, तरक्की कर रहे हैं. लोग आप पर तनकीद (दूध का दूध पानी का पानी) से न चूकेंगे, जब तक आप जमीन में न समा जाएँ या आसमान पर चढ़ जाएँ, यहाँ तक इनकी नजरों से दूर हो जाएँ. जब तक आप इनके बीच हैं आपको अजीयत (तकलीफ) पहुँचती रहेगी, आंसू निकलेंगे, नींद उड़ेगी जो जमीन पर बैठा हुआ है वह नहीं गिरता, इसलिए गम न करें, खुश रहें.

जारी …..