अमिट

अमिट !

नहीं मिटा सकते तुम मुझे.

मैं अमिट हूँ.

मैं अब तक

लिखा ही नहीं गया

फिर बता –

कैसै मिटाओगे मुझे!

जिसे तुम चाहते

मिटा देना है

उसे नहीं लिख सकते तुम.

और मैं वही हूं ,

जिसे तुम मिटा देना चाहते हो

लिखने से पहले.

तुझे भय है –

एक बार, सिर्फ एक बार!

मैं लिखा जाऊं तो

मिटाए नहीं मिट सकता.

तेरा यही भय

मुझे बना जाता है

अमिट!

और मैं बिना लिखाए

अमिट रहता हूँ

एक शाश्वत सृजन की तलाश में . . . !